पुलिस का दावा- प्रेम प्रसंग और 5 करोड़ की जमीन के विवाद के चलते रची गई हत्या की साजिश, प्रेस नोट में सरपंच आजाद का नाम शामिल।

जींद निवासी बिजेंद्र मौर के अपहरण और हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश की जालौन पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट ने कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। पुलिस ने अपनी प्रारंभिक जांच और पूछताछ के आधार पर जींद के सरपंच आजाद का नाम भी इस मामले की कथित साजिश से जोड़ते हुए उल्लेख किया है। प्रेस नोट के अनुसार, पुलिस का दावा है कि बिजेंद्र मौर की हत्या के पीछे प्रेम प्रसंग के साथ-साथ करोड़ों रुपये की जमीन का विवाद भी एक बड़ा कारण था।
जालौन पुलिस के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि मृतक बिजेंद्र मौर का पहले सपना रानी के साथ संबंध था। बाद में सपना रानी ने मोहित मलिक से शादी कर ली। इसके बाद बिजेंद्र मौर और मोहित मलिक के बीच विवाद बढ़ता गया। इसी दौरान बिजेंद्र मौर और सरपंच आजाद के बीच जमीन के लेन-देन को लेकर भी विवाद चल रहा था।
पुलिस के प्रेस नोट में दावा किया गया है कि बिजेंद्र मौर ने अपनी करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन सरपंच आजाद को बेची थी, लेकिन उसे केवल करीब 1 करोड़ रुपये का ही भुगतान मिला, जबकि शेष राशि बाकी थी। पुलिस का आरोप है कि भुगतान और जमीन विवाद को लेकर दोनों पक्षों में तनाव बना हुआ था।
प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि पुलिस जांच में सामने आया कि इसी विवाद के चलते सरपंच आजाद ने कथित तौर पर अन्य आरोपियों के साथ मिलकर बिजेंद्र मौर के अपहरण और हत्या की साजिश रची। पुलिस का दावा है कि कथित रूप से जमीन में हिस्सेदारी का लालच देकर कुछ लोगों को इस साजिश में शामिल किया गया। इसके बाद बिजेंद्र मौर का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई और शव को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के जंगल में ले जाकर डीजल डालकर जला दिया गया, ताकि सबूत नष्ट किए जा सकें।

इस मामले में जालौन पुलिस पहले ही जींद निवासी मोहित मलिक और उसकी पत्नी सपना रानी को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस ने उनके कब्जे से मिले इनपुट के आधार पर मृतक के जले हुए अवशेष भी बरामद किए हैं। वहीं, प्रेस नोट के अनुसार, इस वारदात में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
जालौन पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नोट: यह खबर जालौन पुलिस के आधिकारिक प्रेस नोट में किए गए दावों पर आधारित है। पुलिस द्वारा किसी व्यक्ति का नाम जांच या प्रेस नोट में शामिल किया जाना, अपने आप में उसका दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।